कर्म कारक (Accusative case)
दूसरे शब्दों में- वाक्य में क्रिया का फल जिस शब्द पर पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते है।
इसकी विभक्ति 'को' है।
जैसे- माँ बच्चे को सुला रही है।
इस वाक्य में सुलाने की क्रिया का प्रभाव बच्चे पर पड़ रहा है। इसलिए 'बच्चे को' कर्म कारक है।
राम ने रावण को मारा। यहाँ 'रावण को' कर्म है।
विशेष-कभी-कभी 'को' चिह्न का प्रयोग नहीं भी होता है। जैसे- मोहन पुस्तक पढता है।
कर्मकारक का प्रत्यय चिह्न 'को' है। बिना प्रत्यय के या अप्रत्यय कर्म के कारक का भी प्रयोग होता है। इसके नियम है-
(i) बुलाना, सुलाना, कोसना, पुकारना, जगाना, भगाना इत्यादि क्रियाओं के कर्मों के साथ 'को' विभक्ति लगती है।
जैसे- मैंने हरि को बुलाया।
माँ ने बच्चे को सुलाया।
शीला ने सावित्री को जी भर कोसा।
पिता ने पुत्र को पुकारा।
हमने उसे (उसकी) खूब सबेरे जगाया।
लोगों ने शेरगुल करके डाकुओं को भगाया।
(ii) 'मारना' क्रिया का अर्थ जब 'पीटना' होता है, तब कर्म के साथ विभक्ति लगती है, पर यदि उसका अर्थ 'शिकार करना' होता है, तो विभक्ति नहीं लगती, अर्थात कर्म अप्रत्यय रहता है।
जैसे-
लोगों ने चोर को मारा।
पर- शिकारी ने बाघ मारा।
हरि ने बैल को मारा।
पर- मछुए ने मछली मारी।
कारक सम्बंधित और महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी ( जो सरकारी परीक्षा मे आ चुके है )
बहुधा कर्ता में विशेष कर्तृत्वशक्ति जताने के लिए कर्म सप्रत्यय रखा जाता है। जैसे- मैंने यह तालाब खुदवाया है, मैंने इस तालाब को खुदवाया है। दोनों वाक्यों में अर्थ का अन्तर ध्यान देने योग्य है। पहले वाक्य के कर्म से कर्ता में साधारण कर्तृत्वशक्ति का और दूसरे वाक्य में कर्म से कर्ता में विशेष कर्तृत्वशक्ति का बोध होता है। इस तरह के अन्य वाक्य है- बाघ बकरी को खा गया, हरि ने ही पेड़ को काटा है, लड़के ने फलों को तोड़ लिया इत्यादि। जहाँ कर्ता में विशेष कर्तृत्वशक्ति का बोध कराने की आवश्यकता न हो, वहाँ सभी स्थानों पर कर्म को सप्रत्यय नहीं रखना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, जब कर्म निर्जीव वस्तु हो, तब 'को' का प्रयोग नहीं होना चाहिए। जैसे- 'राम ने रोटी को खाया' की अपेक्षा 'राम ने रोटी खायी ज्यादा अच्छा है। मैं कॉंलेज को जा रहा हूँ; मैं आम को खा रहा हूँ; मैं कोट को पहन रहा हूँ- इन उदाहरणों में 'को' का प्रयोग भद्दा है। प्रायः चेतन पदार्थों के साथ 'को' चिह्न का प्रयोग होता है और अचेतन के साथ नहीं। पर यह अन्तर वाक्य-प्रयोग पर निर्भर करता है।
(iv) कर्म सप्रत्यय रहने पर क्रिया सदा पुंलिंग होगी, किन्तु अप्रत्यय रहने पर कर्म के अनुसार।
जैसे- राम ने रोटी को खाया (सप्रत्यय), राम ने रोटी खायी (अप्रत्यय)।
(v) यदि विशेषण संज्ञा के रूप में प्रयुक्त हों, तो कर्म में 'को' अवश्य लगता है।
जैसे- बड़ों को पहले आदर दो,; छोटों को प्यार करो।


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