Wednesday, May 2, 2018

Karak (Case)(कारक) विशेष अध्ययन भाग - 4 करण कारक (Instrument case)

 करण कारक (Instrument case)
(3)करण कारक (Instrument case):- जिस वस्तु की सहायता से या जिसके द्वारा कोई काम किया जाता है, उसे करण कारक कहते है।
दूसरे शब्दों में- वाक्य में जिस शब्द से क्रिया के सम्बन्ध का बोध हो, उसे करण कारक कहते है।
इसकी विभक्ति 'से' है।
जैसे- ''हम आँखों से देखते है।''
इस वाक्य में देखने की क्रिया करने के लिए आँख की सहायता ली गयी है। इसलिए आँखों से करण कारक है ।

करणकारक के सबसे अधिक प्रत्ययचिह्न हैं। 'ने' भी करणकारक का ऐसा चिह्न है, जो करणकारक के रूप में संस्कृत में आये कर्ता के लिए 'एन' के रूप में, कर्मवाच्य और भाववाच्य में आता है। किन्तु, हिन्दी की प्रकृति 'ने' को सप्रत्यय कर्ताकारक का ही चिह्न मानती है।



हिन्दी में करणकारक के अन्य चिह्न है- से, द्वारा, के द्वारा, के जरिए, के साथ, के बिना इत्यादि। इन चिह्नों में अधिकतर प्रचलित से', 'द्वारा', 'के द्वारा' 'के जरिए' इत्यादि ही है। 'के साथ', के बिना' आदि साधनात्मक योग-वियोग जतानेवाले अव्ययों के कारण, साधनात्मक योग बतानेवाले 'के द्वारा' की ही तरह के करणकारक के चिह्न हैं। 'करन' का अर्थ है 'साधन'। अतः 'से' चिह्न वहीं करणकारक का चिह्न है जहाँ यह 'साधन' के अर्थ में प्रयुक्त हो।


जैसे- मुझसे यह काम न सधेगा। यहाँ 'मुझसे' का अर्थ है 'मेरे द्वारा', 'मुझ साधनभूत के द्वारा' या 'मुझ-जैसे साधन के द्वारा। अतः 'साधन' को इंगित करने के कारण यहाँ 'मुझसे' का 'से' करण का विभक्तिचिह्न है। अपादान का भी विभक्तिचिह्न 'से' है।


'अपादान' का अर्थ है 'अलगाव की प्राप्ति' । अतः अपादान का 'से' चिह्न अलगाव के संकेत का प्रतीक है, जबकि करन का, अपादान के विपरीत, साधना का, साधनभूत लगाव का। 'पेड़ से फल गिरा', 'मैं घर से चला' आदि वाक्यों में 'से' प्रत्यय 'पेड़' को या घर को 'साधन' नहीं सिद्ध करता, बल्कि इन दोनों से बिलगाव सिद्ध करता है। अतः इन दोनों वाक्यों में 'घर' और 'पेड़' के आगे प्रयुक्त 'से' विभक्तिचिह्न अपादानकारक का है और इन दोनों शब्दों में लगाकर इन्हे अपादानकारक का 'पद' बनाता है।


करणकारक का क्षेत्र अन्य सभी कारकों से विस्तृत है। इस कारण में अन्य समस्त कारकों से छूटे हुए प्रत्यय या वे पद जो अन्य किसी कारक में आने से बच गए हों, आ जाते है।
अतः इसकी कुछ सामान्य पहचान और नियम जान लेना आवश्यक है-


(i) 'से' करन और अपादान दोनों विभक्तियों का चिह्न है, किन्तु साधनभूत का प्रत्यय होने पर करण माना जायेगा, जबकि अलगाव का प्रत्यय होने पर अपादान।

जैसे- वह कुल्हाड़ी से वृक्ष काटता है।
मुझे अपनी कमाई से खाना मिलता है।
साधुओं की संगति से बुद्धि सुधरती है।
यह तीनों करण है।
पेड़ से फल गिरा।
घर से लौटा हुआ लड़का।
छत से उतरी हुई लता।
यह तीनों अपादान है।


(ii) 'ने' सप्रत्यय कर्ताकारक का चिह्न है। किन्तु, 'से', 'के द्वारा' और 'के जरिये' हिन्दी में प्रधानतः करणकारक के ही प्रत्यय माने जाते है; क्योंकि ये सारे प्रत्यय 'साधन' अर्थ की ओर इंगित करते हैं।

जैसे-
मुझसे यह काम न सधेगा।
उसके द्वारा यह कथा सुनी थी।
आपके जरिये ही घर का पता चला।
तीर से बाघ मार दिया गया।
मेरे द्वारा मकान ढहाया गया था।


(iii) भूख, प्यास, जाड़ा, आँख, कान, पाँव इत्यादि शब्द यदि एकवचन करणकारक में सप्रत्यय रहते है, तो एकवचन होते है और अप्रत्यय रहते है, तो बहुवचन।


जैसे- वह भूख से बेचैन है;............ वह भूखों बेचैन है;
लड़का प्यास से मर रहा है;............ लड़का प्यासों मर रहा है।
स्त्री जाड़े से काँप रही है;............. स्त्री जाड़ों काँप रही है।
मैंने अपनी आँख से यह घटना देखी;........ मैंने अपनी आँखों यह घटना देखी।
कान से सुनी बात पर विश्र्वास नहीं करना चाहिए;.......... कानों सुनी बात पर विश्र्वास नहीं करना चाहिए
लड़का अब अपने पाँव से चलता है;............. लड़का अब अपने पाँवों चलता है।

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