Thursday, May 3, 2018

Karak (Case)(कारक) विशेष अध्ययन भाग - 8 - अधिकरण कारक (Locative case)


अधिकरण कारक (Locative case)


(7)अधिकरण कारक (Locative case):-शब्द के जिस रूप से क्रिया के आधार का ज्ञान होता है, उसे अधिकरण कारक कहते है।
दूसरे शब्दों में- क्रिया या आधार को सूचित करनेवाली संज्ञा या सर्वनाम के स्वरूप को अधिकरण कारक कहते है।

इसकी विभक्ति 'में' और 'पर' हैं।
जैसे-
मोहन मैदान में खेल रहा है। इस वाक्य में 'खेलने' की क्रिया किस स्थान पर हो रही है ?
मैदान पर। इसलिए मैदान पर अधिकरण कारक है।
दूसरा उदाहरण-''मनमोहन छत पर खेल रहा है।'' इस वाक्य में 'खेलने' की क्रिया किस स्थान पर हो रही है?

'छत पर' । इसलिए 'छत पर' अधिकरण कारक है।

(i) कभी-कभी 'में' के अर्थ में 'पर' और 'पर' के अर्थ में 'में' का प्रयोग होता है। जैसे- तुम्हारे घर पर चार आदमी हैं=घर में। दूकान पर कोई नहीं था =दूकान में। नाव जल में तैरती है =जल पर।

(ii) कभी-कभी अधिकरणकारक की विभक्तियों का लोप भी हो जाता है। जैसे-
इन दिनों वह पटने है।
वह सन्ध्या समय गंगा-किनारे जाता है।
वह द्वार-द्वार भीख माँगता चलता है।
लड़के दरवाजे-दरवाजे घूम रहे हैं।
जिस समय वह आया था, उस समय मैं नहीं था।
उस जगह एक सभा होने जा रही है।

(iii) किनारे, आसरे और दिनों जैसे पद स्वयं सप्रत्यय अधिकरणकारक के है और यहाँ, वहाँ, समय आदि पदों का अर्थ सप्रत्यय अधिकरणकारक का है। अतः इन पदों की स्थिति में अधिकरणकारक का प्रत्यय नहीं लगता।

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